ISBN NO- 978-93-89294-38-5
डॉ. कृषण दुबे, सलोनी अग्रवाल
विक्रय एवं विज्ञापन
इकाई-1
विक्रय- अवधारणा, प्रकृति तथा विपणन में इसकी भूमिका, वैयक्तिक विक्रय-वैयक्तिक विक्रय का उभरता हुआ परिदृष्य, एक सफल विक्रयकर्ता की विषेषताएँ, एक आजीविका रूप में विक्रय का चयन, विक्रय प्रषिक्षण, उपभोक्ता मनोविज्ञान तथा क्रम उद्देष्य, उपभोक्ता तथा औधोगिक उत्पाद के विक्रय में अन्तर।
इकाई-2
विक्रय प्रक्रिया- प्रत्याषा, पूर्व दृष्टिकोण, दृष्टिकोण, विक्रय प्रस्तुतिकरण तथा प्रदर्षन आपत्तियों से निपटना अर्थात् निवारण, विक्रय समाप्ति करना, विक्रय के बाद सेवा, प्रभावषाली विक्रय षैलियाँ, वैयक्तिक विक्रय में सम्बन्धी विपणन की भूमिका, विक्रय के साधन/तरीके, विक्रयकर्त्ता को अभिप्रेरित तथा पारिश्रमिक देना।
इकाई-3
विज्ञापन- अवधारणा, भूमिका, कार्य, क्षेत्र तथा प्रकार, विज्ञापन के आर्थिक, सामाजिक, कानूनी तथा नैतिक पहलू, विज्ञापन अपीलें-अर्थ, प्रकार एवं प्रस्तुतीकरण, एक प्रेरक संचार प्रक्रिया के रूप में विज्ञापन, विज्ञापन डिजाइन (बनावट) विज्ञापन प्रतिलिपि की विषेषताएँ तथा मूल तत्त्व, सृजन, उत्पादन तथा नियोजन, विज्ञापन बजट-प्रकार, घटक तथा बनाने की प्रक्रिया, विज्ञापन एजेन्सी- कार्य एजेन्सी का चुनाव।
इकाई- 4
एकीकृत विपणन संचार के घटक के रूप में विज्ञापन, ए. आई. डी. ए. तथा डी. ए. जी. एम. आर. मॉडल, विज्ञापन मीडिया-प्रकार (प्रिन्ट, वाह्य, इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य), विषेषताएँ गुण तथा प्रत्येक मीडिया प्रकार की सीमाएँ। मीडिया योजना-मीडिया श्रेणी का चयन, उनका विस्तार आवृत्ति, प्रभाव, लागत तथा मीडिया चुनाव के अन्य प्रभावी कारक, ग्रामीण तथा दूरदराज इलाके तक पहुँचने में समस्या/विज्ञापन प्रभावी कारक, ग्रामीण तथा दूरदराज इलाके तक पहुँचने में समस्या, विज्ञापन प्रभावषीलता का मूल्यांकन- महत्त्व, कठिनाइयों तथा विज्ञापन प्रभावषीलता को मापने के तरीके।
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ISBN NO- 978-93-89294-38-5
डॉ. कृषण दुबे, सलोनी अग्रवाल
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