ISBN- 978-93-90460-47-2
AUTHOR- Dr. Pratibha Ray
पाठ्यक्रम
ज्ञान एवं पाठ्यचर्या
इकाई 1- शिक्षा की अवधारणा
1 जीवन में शिक्षा का अर्थ, प्रकृति एवं स्थान को समझना- विद्या, अविद्या, शिक्षा, इल्म, तालीम एवं उपनिषद बौद्ध, इस्लामी एवं पश्चिमी साहित्य से शिक्षा जैसे शब्दों के विषय में संक्षिप्त परिचय।
2 भारतीय विरासत पर चिंतन, शिक्षा की विभिन्न अभिकरणों के माध्यम से दर्शन, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं की भूमिका एवं मानवीय मूल्यों को आकार देना, तैत्तिरीय उपनिषद में दीक्षांत संदेश।
इकाई 2- शिक्षा के दार्शनिक आधार
1 शिक्षा-दर्शन- अवधारणा, कार्यक्षेत्र एवं आवश्यकता।
2 दर्शन और शिक्षा के बीच सम्बन्ध।
3 शिक्षा के प्रमुख दर्शन (आदर्शवाद, प्रकृतिवाद, यथार्थवाद एवं प्रयोजनवाद) उद्देष्य, पाठ्यचर्या, विधियों, शिक्षक के सम्बन्धों एवं अनुशासन तथा आधुनिक शिक्षा पर इसके प्रभाव के संदर्भ में।
4 उद्देष्य, पाठ्यचर्या, विधियाँ, शिक्षक के सम्बन्धों के सन्दर्भ में शिक्षा के प्रमुख भारतीय दर्शन, वेदान्त, बौद्ध धर्म एवं इस्लामी परम्परा के सम्बन्ध अनुशासन एवं आधुनिक शिक्षा पर इसका प्रभाव।
5 निम्नलिखित विजनरी के विषय में अध्ययन-
गुरुदेव टैगोर (शांति निकेतन), महात्मा गांधी (बेसिक शिक्षा), स्वामी विवेकानन्द (नव्य वेदांत और मानव निर्माण शिक्षा) और श्री अरबिंदो (एकात्म शिक्षा)
इकाई 3- शिक्षा का समाजशास्त्रीय आधार
1 शैक्षिक समाजशास्त्र-अवधारणा, क्षेत्र एवं आवष्यकता।
2 शिक्षा के व्यक्तिगत एवं सामाजिक उद्देष्य।
3 समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रवर्तक के रूप में शिक्षा।
4 समाजीकरण की प्रक्रिया के रूप में शिक्षा।
5 सामाजिक परिवर्तन एवं आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में शिक्षा की भूमिका।
6 राष्ट्रीय एकता, भावनात्मक एकीकरण एवं अंतर्राष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देने में शिक्षा की भूमिका और
7 धर्म, संस्कृति एवं शिक्षा।
इकाई 4- पाठ्यचर्या का वैचारिक ढांचा
1 पाठ्यचर्या- अवधारणा, उद्देष्य एवं प्रकार
2 पाठ्यचर्या निर्माण के सिद्धान्त और
3 पाठ्यचर्या एवं अध्ययन विषय
इकाई 5- पाठ्यचर्या एवं विद्यालय
1 शिक्षा एवं पाठ्यचर्या के उद्देश्यों के बीच सम्बन्ध
2 पाठ्यचर्या निर्माण में शिक्षक की भूमिका एवं
3 पाठ्यचर्या एवं अध्ययन विषय
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ISBN- 978-93-90460-47-2
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