Jitendra Kumar Singh, Seema Bishnoi
ISBN: 978-93-89627-75-6
पाठ्यक्रम
पाटलिपुत्र
बाल्यावस्था एवं विकास
;ब्ीपसकीववक ंदक ळतवूपदह न्चद्ध
इकाई 1- बाल्यावस्था का विकास ;प्दजतवकनबजपवद ज्व ब्ीपसकीववकद्ध
ऽ बाल्यावस्था की अवधारणा वृद्धि एवं विकास ।
ऽ विकास की अवस्थाएँ- शारीरिक, मानसिक, सवंेगात्मक, सामाजिक एवं नैतिक ।
ऽ बाल्यावस्था को प्रभावित करने वाले कारक- परिवार, साथी-समूह, आस-पड़ोस, विद्यालय एवं समुदाय।
इकाई 2-किषोरावस्था की समझ ;न्दकमतेजंदकपदह ।कवसमेबमदबमद्ध
ऽ किषोर एवं सांस्कृतिक भिन्नता, किशोरों के अनुभव पर नगरीकरण का प्रभाव एवं किषोरों के अनुभव पर आर्थिक परिवर्तन का प्रभाव ।
ऽ किषोर के रूप में बढ़ना- किषोर पर धर्म, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, लिंग,वर्ग,गरीबी और मीडिया का प्रभाव।
ऽ बाल्यावस्था एवं किषोरावस्था- भारतीय किषोर की समस्याएँ एवं अध्यापक, परिवार और समुदाय की भूमिका।
इकाई 3- विकास के परिप्रेक्ष्य ;च्मतेचमबजपअम प्द क्मअमसवचउमदजद्ध
ऽ विकास के परिप्रेक्ष्य में अवधारणा एवं परिचय एवं पियाजे व वायगोट्स्की के सन्दर्भ में विकास के सिद्धान्त।
ऽ विकास के अध्ययन की स्थायी विषयवस्तु- बहुआयामी एवं बहुमुखी/बहुलता के रूप में विकास, जीवनकाल में सतत् रूप से विकास, विकास एक सतत् या असतत् प्रक्रिया, विकास पर सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का प्रभाव।
इकाई 4-भाषा विकास ;स्ंदहनंहम क्मअमसवचउमदजद्ध
ऽ वाणी एवं भाषा का विकास।
ऽ भाषा विकास की अवस्थाएँ ।
ऽ भाषा विकास को प्रभावित करने वाले कारक।
ऽ द्विभाषिक एवं बहुभाषिक बालक- शिक्षक के लिए शैक्षणिक निहितार्थ।
इकाई 5- अपने प्राकृतिक परिवेष में बच्चे ;ब्ीपसकतमद प्द ज्ीमपत छंजनतंस ैमजजपदहेद्ध
ऽ बच्चों के जीवन्त अनुभव पर लिंग, जाति, सामाजिक वर्ग, शहरीकरण,एवं आर्थिक परिवर्तन का प्रभाव।
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Jitendra Kumar Singh, Seema Bishnoi
ISBN: 978-93-89627-75-6
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